सुप्रीम कोर्ट का फैसला
20 लाख मुआवजा व 50 लाख FDR के मिलेंगे
कोरोना में ड्यूटी पर जान गंवाने वाले डिस्कॉम के 2 कर्मियों को 70-70 लाख देने के आदेश
mad news 7जेठू जोशी
बिलाड़ा
कोरोना ड्यूटी के दौरान दिवंगत हुए कर्मचारियों के आश्रितों को आखिरकार न्याय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जोधपुर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक आदेश को बरकरार रखते हुए जोधपुर डिस्कॉम को निर्देश दिया है कि वह दिवंगत अधिकारियों कर्मचारियों के परिजनों को चार सप्ताह के भीतर 20 लाख रुपए का भुगतान करें, साथ ही 50 लाख रुपए की एफडीआर किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में जमा कराए।
यह आदेश एक्सईएन पद पर कार्यरत दिवंगत अधिकारी की पत्नी सुगन प्रजापत और बिलाड़ा निवासी हेल्पर प्रवीण कुमार की पत्नी दीपिका की याचिकाओं के तहत मिला है। हाईकोर्ट ने दोनों ही मामलों में 70 70 लाख रुपए के भुगतान का आदेश दिया था, जिसे डिस्कॉम ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
मुआवजे का वादा था, फिर मुकर गया था डिस्कॉम
राज्य सरकार की तर्ज पर जोधपुर डिस्कॉम ने भी कोरोना ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों को 50 लाख रुपए सहायता राशि देने की घोषणा की थी। इसके अलावा 20 लाख रुपए की एक्स ग्रेशिया राशि भी पूर्व से ही तय थी। लेकिन बाद में डिस्कॉम ने आश्रितों को यह भुगतान करने से इनकार कर दिया, जिससे आहत होकर सुगन प्रजापत और दीपिका ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी की अदालत ने सुगन प्रजापत के पक्ष में और न्यायाधीश फरजंद अली की पीठ ने दीपिका के पक्ष में आदेश पारित किए। इसके बाद भी आदेश की पालना नहीं होने पर दोनों महिलाओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिकाएं दायर कीं।
डिस्कॉम के एमडी को 15 जुलाई को पेश होने के आदेश
अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जोधपुर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक डॉ. भंवरलाल (आईएएस) को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एम.आर. जस्टीस उज्जल भुयान एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश न्यायोचित है और उसे लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सुगन प्रजापत को चार सप्ताह में 20 लाख रुपए का भुगतान किया जाए और 50 लाख रुपए की एफडीआर कराई जाए। यह राशि फिलहाल डिवीजन बेंच के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।


