जोधपुर ऑपरेशन क्रिसेंट मून में साइक्लोनर टीम ने मादक पदार्थ तस्कर चंद्र प्रकाश को धर दबोचा
जोधपुर रेंज पुलिस की साइक्लोनर टीम ने ऑपरेशन क्रिसेंट मून चलाकर कुख्यात मादक पदार्थ तस्कर चंद्र प्रकाश उर्फ सीपी (28) को गिरफ्तार कर लिया। 13 साल से मादक पदार्थों की तस्करी का किंगपिन बना चंद्र प्रकाश, जिस पर 25,000 रुपये का इनाम था, जोधपुर के लाखेटा मतोड़ा का रहने वाला है। जोधपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि सीमा पर तनाव कम होते ही साइक्लोनर टीम ने तस्करों पर नकेल कसते हुए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
चंद्र प्रकाश दिसंबर 2024 में ऑपरेशन मनुहार के तहत 500 किलोग्राम गांजे की रिकॉर्ड जब्ती का मुख्य सूत्रधार था। यह गांजा पंजाब और हरियाणा तक पहुंचने वाला था, जिसके तार झारखंड और बिहार से जुड़े थे। उसका आपराधिक इतिहास 2013 से शुरू हुआ, जब पाली में 3 क्विंटल डोडा चूरा तस्करी का पहला मामला दर्ज हुआ। इसके बाद मादक पदार्थ तस्करी, वाहन चोरी, आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले जैसे कई मामले राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार और पंजाब के विभिन्न थानों में दर्ज हुए।
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि चंद्र प्रकाश की जिंदगी चंद्रमा की कलाओं जैसी थी—6 महीने जेल में और 6 महीने बाहर, जिसके चलते ऑपरेशन का नाम क्रिसेंट मून रखा गया। जेल में रहते हुए वह अपने नेटवर्क को मजबूत करता और बाहर निकलकर करोड़ों की कमाई करता। उसकी जीवनी अमिताभ बच्चन और दिलीप कुमार की फिल्म ‘शक्ति’ की कहानी से मिलती-जुलती है। देशभक्त सैनिक पिता ने बेटे की अपराधी प्रवृत्ति देखकर उससे सारे रिश्ते तोड़ लिए और कभी उसकी जमानत तक नहीं कराई।
चंद्र प्रकाश पिछले 5 महीनों से भूमिगत था। साइक्लोनर टीम ने उसके जेल में बंद गुर्गों पर नजर रखी और उनके जरिए हिसाब-किताब के विवाद को ट्रेस कर जोधपुर में उसके ठिकाने तक पहुंची। गुरुवार शाम को टीम ने उसे धर दबोचा। ऑपरेशन में उपनिरीक्षक कन्हैयालाल, नेमाराम, हेड कांस्टेबल महेंद्र, कांस्टेबल राकेश कुमार, मनीष परमार, जोगाराम और कमांडो भंवर शामिल थे। हेड कांस्टेबल महेंद्र की भूमिका अहम रही।
पुलिस अब चंद्र प्रकाश के काले कारनामों और अवैध धंधे के हिसाब-किताब की जांच में जुटी है। यह गिरफ्तारी मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता मानी जा रही है।


