एसआई भर्ती 2021 में आया एक और अहम मोड़..800 चयनित एसआई को मिली बड़ी राहत.. भर्ती रद्द करने पर ‘डिवीजन बेंच की रोक’!एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर बड़ा फैसला
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जयपुर। प्रदेश में बहुप्रतीक्षित सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 की परीक्षा रद्द करने में एक बड़ा मोड़ आ गया है। सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एकल पीठ द्वारा भर्ती रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब यह मामला जस्टिस एसपी शर्मा की खंडपीठ में सुनवाई के लिए तय किया गया है। अमर सिंह व अन्य चयनित सब इंस्पेक्टरों ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है। अपील में कहा गया है कि पेपर लीक का मामला व्यापक स्तर पर नहीं हुआ था, बल्कि यह कुछ व्यक्तियों तक ही सीमित था। आरपीएससी सदस्यों द्वारा लीक पेपर भी केवल उनके बच्चों और रिश्तेदारों तक पहुंचा था। ऐसे में पूरी भर्ती को रद्द करना कानून सम्मत नहीं है। अपीलकताओं ने यह भी दलील दी कि भर्ती की सभी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उन्हें नियुक्ति दी गई है। इस प्रकार उनके अधिकार सृजित हो चुके हैं और अब उन्हें नियुक्ति से वंचित करना न्यायसंगत नहीं होगा। कई चयनित उम्मीदवारों ने इस भर्ती के लिए अन्य सरकारी नौकरियां छोड़ी थीं। ऐसे में संपूर्ण भर्ती को निरस्त करना उनके साथ गंभीर अन्याय होगा। ट्रेनी एसआई की ओर से वरिष्ठ वकील आरएन माथुर, कमलाकर शर्मा, अलंकृता शर्मा और तनवीर अहमद पैरवी करेंगे। वहीं दूसरी ओर जिन याचिकाकताओं के पक्ष में सिंगल बेंच का फैसला आया था, उन्होंने हाईकोर्ट में कैविएट दायर कर रखी है। उनके वकील हरेन्द्र नील ने कहा कि हम डिवीजन बेंच में भी मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि यदि सही और गलत में छंटनी संभव न हो, तो भर्ती रद्द करना ही न्यायोचित कदम है। ऐसे में डिवीजन बेंच का फैसला हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करेगा।
बीजेपी सरकार ने एसआईटी से करवाई थी केस की जांच
बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में ऐलान किया था कि अगर वह सत्ता में आई तो पेपर लीक के मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित करेगी। दिसंबर 2023 में बीजेपी ने सत्ता में आते ही घोषणा के अनुरूप एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी की जांच में सामने आया कि सब इस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का भी पेपर लीक हुआ था। उसके बाद पूरे
प्रदेश में सियासी घमासान मच गया था। एसआईटी ने एसआई भर्ती परीक्षा पेपर लीक केस का खुलासा करते हुए नकल कर वर्दी हथियाने वाले 50 से ज्यादा थानेदारों को दबोच लिया था। वहीं इस मामले में फर्जी थानेदारों समेत 100 से ज्यादा पेपर लीक माफिया दलाल और अन्य आरोपी पकड़े गए थे।
अब डिवीजन बेंच में होगी सुनवाई हालांकि चयनित एसआई को नहीं दी जा सकेगी फील्ड पोस्टिंग
कोर्ट में अपीलकताओं का तर्क-पेपर लीक बड़े स्तर पर नहीं हुआ और भर्ती रद्द करना अनुचित
हालांकि सही-गलत में अंतर नहीं हुआ तो फिर रद्द हो सकती है एसआई भर्ती
सिंगल बेंच ने 28 को परीक्षा रद्द करने का सुनाया था फैसला
पेपर लीक खुलासे के बाद परीक्षा को रद्द करने की मांग उठने लगी थी। मामले की गंभीरता को देखते भजनलाल सरकार ने परीक्षा को रद्द या नहीं करने के लिए मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया था। हालांकि समिति ने ईमानदार अभ्यर्थियों का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द नहीं करने की अनुशंसा की थी। लेकिन परीक्षा में वंचित रहे कई अभ्यर्थी होईकोर्ट चले गए। उसके बाद हाईकोर्ट में चली लंबी बहस के बाद 28 अगस्त को हाईकोर्ट जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला सुनाया था। इससे प्रभावित कई अभ्यर्थी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में चले गए। अब डबल बेंच ने उस आदेश पर फिलहाल स्टे लगा दिया है।
कोर्ट ने पूछा-एसओजी की रिपोर्ट याचिकाकताओं के पास कैसे आई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि एकलपीठ के याचिकाकताओं के पास एसओजी की रिपोर्ट कैसे आई। कोर्ट ने कहा कि एडीजी वीके सिंह के साइन की रिपोर्ट बिना उनके शपथ-पत्र के याचिकाकताओं के पास आने का गंभीर मामला है। की बात भी कहीं। कोर्ट ने इस बात पर भी आश्चर्य कोर्ट ने मौखिक रूप से डीजीपी से स्पष्टीकरण मांगने जताया कि एकलपीठ ने इस रिपोर्ट को कैसे आधार बना लिया। कोर्ट के इस रुख पर एडवोकेट हरेंद्र नील ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के कई जजमेंट है कि अगर रिपोर्ट सही है तो अदालत उसे दरकिनार नहीं कर सकती है।


