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सत्ता से टकराने की क्षमता भी थी भगवान सिंह रोलसाहबसर में।अंतिम संस्कार में राजपूत ही नहीं सर्वसमाज के हजारों लोग आए।एक समाज के माध्यम से सर्वसमाज की समस्याओं का समाधान कैसे किया जा सकता है, यह क्षत्रीय युवक संघ के प्रमुख भगवान सिंह रोलसाहबसर के जीवन से सीखा जा सकता है

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सत्ता से टकराने की क्षमता भी थी भगवान सिंह रोलसाहबसर में।अंतिम संस्कार में राजपूत ही नहीं सर्वसमाज के हजारों लोग आए।एक समाज के माध्यम से सर्वसमाज की समस्याओं का समाधान कैसे किया जा सकता है, यह क्षत्रीय युवक संघ के प्रमुख भगवान सिंह रोलसाहबसर के जीवन से सीखा जा सकता है

 

6 जून को भले ही रोलसाहबसर के शव को अग्नि को समर्पित कर दिया गया हो, लेकिन उनके जीवन से सर्व समाज के लोग सदियों तक प्रेरणा लेते रहेंगे। उनके द्वारा किए गए कार्यों का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि 6 जून को जयपुर में हुए अंतिम संस्कार में राजपूत ही नहीं सर्व समाज के हजारों लोगों ने शिरकत की। इनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित राज्य के कई मंत्री, सांसद, विधायक आदि उपस्थित रहे। सामान्य वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण दिलवाने में रोलसाहबसर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका कहना था कि सामान्य वर्ग में भी ऐसे परिवार है, जो आरक्षित वर्ग के परिवारों से भी गरीब हैं। जब पिछड़ों को आरक्षण देने की नीति है तो फिर हर गरीब परिवार को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। आज सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों को दस प्रतिशत का लाभ मिल रहा है, उसमें सर्वसमाज के साथ साथ रोलसाहबसर के क्षत्रीय युवक संघ की प्रमुख भूमिका रही है। राजपूत समाज के युवकों को अनुशासित बनाने में रोलसाहबसर का विशेष योगदान रहा है। समाज के हजारों युवक आज उच्च पदों पर रोलसाहबसर के अनुशासन के कारण ही है। रोलसाहबसर अपने जीवन में सत्ता से टकराने में भी पीछे नहीं रहे।

 

अशोक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के घोटाले के प्रकरण में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को लेकर भगवान सिंह रोलसाहबसर को घसीट लिया। गहलोत का कहना था कि रोलसाहबसर को तो दबाव देकर शेखावत से संजीवनी के पीडि़तों को पैसा दिलवाना चाहिए। इस पर रोलसाहबसर तीखी प्रतिक्रिया दी और अशोक गहलोत को आगह किया, संजीवनी और शेखावत के मामले को राजपूत समाज से न जोड़ा जाए। उस समय रोलसाहबसर ही ऐसी हिम्मत दिखा सकते थे, जो सरकार से सीधी टक्कर ले सकते थे। ऐसे कई मौके आए जब रोलसाहबसर ने सरकार के सामने अपना पक्ष मजबूती के साथ राख।

 

एक युग का अंत:

श्री क्षत्रिय युवक संघ के चतुर्थ संघ प्रमुख माननीय भगवानसिंह रोलसाहबसर नहीं रहे। 2 फरवरी 1944 को सीकर जिले की रोलसाहबसर फतेहपुर में जन्मे भगवान सिंह ने चमडिय़ा कॉलेज फतेहपुर से मैट्रिक व रुईया कॉलेज रामगढ शेखावाटी से प्री यूनिवर्सिटी की पढ़ाई के दौरान ही रोलसाहबर ने 1961 में रतनगढ़ में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर से सामाजिक क्षेत्र में भागीदारी शुरू की । तब से अब तक वह मिशनरी अंदाज में समाज उत्थान और संस्कार निर्माण में जुटे रहे। 1964-65 में पूज्य तनसिंह के सान्निध्य में दिल्ली रहने लगे जब वे सांसद थे। 1967 में पूज्य तनसिंह जी ने सिवाना (बाड़मेर) में व्यवसाय प्रारंभ किया तो उनके प्रथम सहयोगी के रुप में साथ रहने लगे। सिवाना के ठाकुर तेजसिंह की सुपुत्री से इसी दौरान आपका विवाह हुआ। यहीं पूज्य तनसिंह एवं पूज्य नारायणसिंह का निकट सान्निध्य, सामीप्य एवं मार्गदर्शन मिलता रहा। दिसंबर 1979 में पूज्य तनसिंह के देहावसान के उपरांत पूज्य नारायणसिंह में तनसिंह के ही स्वरुप का दर्शन पाकर निरंतर सान्निध्य पाते रहे। पूज्य नारायण सिंह के जीवन में यौगिक अनुभव प्रकट होने लगे और ज्यों ज्यों वे भौतिक रुप से संघ कार्य से अलग रहने लगे त्यों त्यों आप पर दायित्व आता रहा। अनौपचारिक रुप से संघ की सभी गतिविधियों के संचालन का दायित्व आप पर आ गया। अक्टूबर 1989 में पूज्य नारायणसिंह के देहावसान के बाद संघप्रमुख का गहन दायित्व आप पर आया। एक तरफ पूज्य तनसिंह व पूज्य नारायणसिंह के वरदहस्त का भौतिक अभाव था वहीं 28 वर्षों तक उनके सामीप्य एवं सान्निध्य का अनुभव था। संघप्रमुख बनते ही राजस्थान के पूर्वी छोर से गुजरात के पश्चिमी छोर स्थित समुद्रतट तक संघ के हर नये पुराने स्वयंसेवक से व्यक्तिगत संपर्क साधने के लिए यात्राएं की। प्रशिक्षण शिविरों एवं शाखाओं की संख्या में आशातीत वृद्धि होने लगी। संघ के स्वर्ण जयंती के दिन 22 दिसंबर 1996 को संघ के वृहद स्वरुप का संसार को दर्शन करवाया। अब तक पुरुष वर्ग तक सीमित संघ महिलाओं व बालिकाओं तक पहुंचा। बालिकाओं के भी प्रशिक्षण शिविर लगने लगे। इसके साथ ही संघ का परिवारों में प्रवेश हुआए दंपति शिविर लगने लगे। बड़े बड़े समारोहों के रुप में पूज्य तनसिंह का पार्थिव स्वरुप श्री क्षत्रिय युवक संघ प्रकट होने लगा।

जयपुर, जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, कुचामन एवं गुजरात के सुरेन्द्रनगर में संघ के स्थायी कार्यालय बने। बाड़मेर में संघ का एक आदर्श शिविर स्थल ष्आलोक आश्रमष् के रुप में विकसित हुआ। सीकर में बालिका शिक्षा का नया प्रकल्प श्री दुर्गा महिला विकास संस्थान प्रारंभ हुआ। संघ का विस्तार क्षेत्र गुजरात व राजस्थान से बाहर निकलकर महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश के साथ साथ सुदूर दक्षिण के राज्यों तक विस्तारित हुआ। जून 2020 तक आप संघ के कुल 330 शिविरों में शामिल हो चुके हैं। संघ के स्वरुप के कारण समाज भी संघ से विभिन्न प्रकार की अपेक्षाएं करने लगा। उन अपेक्षाओं को समझा एवं तद्नुसार प्रयास प्रारंभ किए। राजनीति में समाज के लोगों के संरक्षक की भूमिका में उभरे वहीं समाज के राजनीतिज्ञों को संस्थागत रुप से समाज के आम नागरिकों से जोडऩे का प्रयास श्री प्रताप फाउण्डेशन के रुप में गतिमान है। इसके अलावा भी समाज के विभिन्न वर्गों की अपेक्षाओं को समझकर उन्हें संघ की मूल धारा से जोडऩे के अनेक नवीन प्रयास निरंतर जारी हैं। राष्ट्र की विभिन्न अग्रणी सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से संपर्क साधकर उनमें अपने व्यक्तित्व के बल पर संघ की छाप छोड़ रहे हैं। इसी बीच आपका संपर्क यथार्थ गीता के प्रणेता स्वामी अडग़ड़ानंद महाराज से हुआ एवं उनके मार्गदर्शन में आध्यात्म का वास्तविक स्वरुप अपने साथियों को समझाकर उस मार्ग पर आरुढ कर रहे हैं। भारत की पूरी पश्चिमी सीमा से लेकर पूर्व में कलकत्ता तक एवं सुदूर दक्षिण तक अपने संपर्कों के माध्यम से पूज्य स्वामी के संदेश को पहुंचा रहे हैं। इस प्रकार 1989 से ही लगातार श्री क्षत्रिय युवक संघ के आदर्श नेतृत्व के रुप में संपूर्ण समाज को दिशा देने के लिए अथक परिश्रम करने वाले माननीय भगवानसिंह जी आज अपने प्रत्येक सहयोगी के लिए अनासक्त एवं निर्विकार मार्गदर्शक बनकर मार्गदर्शन कर रहे हैं और उन्हें अंगुली पकङकर जीवन लक्ष्य की ओर खींच रहे हैं। 4 जुलाई 2021 को आपने श्री क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक व मार्गदर्शक की भूमिका अंगीकार करते हुए माननीय लक्ष्मण सिंह बैण्यांकाबास को संघप्रमुख का औपचारिक दायित्व सौंपा।

 

श्रद्धांजलि:

सोलसाहबसर के निधन पर श्री क्षत्रीय प्रतिभा विकास एवं शोध संस्थान अजमेर के अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह राठौड़, राजवंश संस्थान लोहागल के सुरेदं्र सिंह थेबड़ी, परमवीर मेजर शैतान सिंह राजपूत छात्रावास के सुमेर सिंह शेखावत, राजपूत विकास परिक्षद के रणजीत सिंह नोसल, क्षत्रिय महासभा के बहादुर सिंह पीपरौली व भगवान सिंह मझेवला, जयमल कोट पुष्कर के महेंद्र सिंह कड़ैल सभ क्षत्रिीय प्रतिनिधि संस्थाओं के प्रवक्ता लक्ष्मण सिंह गेमलियावास, डॉ. लोकेश शेखावत, प्रो.शिवदयाल सिंह, देवेंद्र सिंह शेखावत, महेंद्र सिंह रलावता, सुरेंद्र सिंह शेखावत आदि ने सोलसाहबसर के निधन पर अपनी संवेदनाए प्रकट की है।

Mad News 7
Author: Mad News 7

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Pelli Poola Jada
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