2021 में सरपंच ने भूमिहीनों की हक के पट्टे पिता, भाई-भतीजों व दुकान पर काम करने वालों को दिए
जेठू जोशी| खबर गुड़ामालानी की
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021 में पट्टों के फर्जीवाड़े का मामला, अपने चहेतों में बांटी रेवड़ियां सवाल: एक दिन में जारी किए 400 पट्टे, सरपंच खुद 59 फर्जी मान रही तो 341 सही कैसे, जबकि कई भूमिहीन नहीं जांच कमेटी गठित, आज तक रिपोर्ट नहीं दी
गुड़ामालानी ग्राम पंचायत से नगर पालिका में क्रमोन्नत होने के बाद अब फर्जी पट्टों के मामले खुलने शुरू हो गए हैं। इसमें पूर्व में सरपंच व सरपंच प्रतिनिधि ने कुछ लोगों पर फर्जी सील बनाकर फर्जी पट्टे जारी करने के मामले दर्ज करवाए थे। अब सरपंच व उनके ससुर पर भी फर्जी पट्टे देने के मामले सामने आ रहे हैं।
प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021 के दौरान गरीब और भूमिहीन लोगों को बसावट के लिए पट्टे जारी करने का प्रावधान था, लेकिन इस शिविर में सरपंच अनुराधा शर्मा व उनके ससुर सरपंच प्रतिनिधि दिनेश शर्मा ने अपने परिवार के सदस्यों और चहेते सरकारी कर्मचारियों को नियम विरुद्ध पट्टे जारी कर दिए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 157/2 को ताक पर रखकर अपने पिता, भाई, भतीजों, दुकान कर्मचारियों को भी भूखंडों के पट्टे दिए। गुड़ामालानी ग्राम पंचायत के दे ने 400 से अधिक पट्टे फर्जी जारी किए हैं। जबकि सरपंच ने सिर्फ 59 पट्टों को फर्जी बताकर पुलिस में मामला दर्ज करवाया है। ऐसे में सवाल यह है कि बाकी 341 पट्टा धारकों के खिलाफ क्यों नहीं बोल रहे हैं?
परमेश्वर लाल शर्मा पूर्व सरपंच दिनेश पी शर्मा के पिता के नाम जारी पट्टा।
सरपंच ने इन रिश्तेदारों व कार्मिकों को जारी किए नियम विरुद्ध पट्टे
सरपंच प्रतिनिधि दिनेश शर्मा ने अपने पिता सेवानिवृत सरकारी कर्मचारी परमेश्वर लाल शर्मा के नाम पट्टा दे दिया। इसी तरह भाई रामस्वरूप, भतीज चंद्र प्रकाश शर्मा, भाई के पुत्र ललित शर्मा, कांतिलाल शर्मा व विशाल शर्मा के नाम इसी अभियान में पट्टे जारी कर दिए। इसी तरह अपनी हार्डवेयर की दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी रतनाराम माली व शंकराराम कलबी के नाम भी भूखंडों के पट्टे
ललित का पट्टा, दिनेश पी शर्मा के सगे भाई का पुत्र व सरकारी कर्मचारी।
दे दिए। नियमानुसार पट्टे देने से पहले लाभार्थी की पात्रता जांच, सार्वजनिक सूचना और आपत्तियों का मौका देना चाहिए, लेकिन इन सबकी अनदेखी की है। राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 157/2 के तहत केवल वही लोग पात्र हैं, जो भूमिहीन हो और जिनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन न हो। सरकारी कर्मचारी, संपत्ति मालिक या आर्थिक रूप से सक्षम लोग इस योजना से बाहर हैं।
पट्टों में फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद कुछ लोगों ने इसकी शिकायत व आपत्तियां भी दर्ज करवाई थी। आरटीआई एक्टिविस्ट दिनेश विश्नोई व जागृति मंच के सुरेश जैन ने बताया कि फर्जी पट्टों की जांच के लिए उपखंड स्तर व जिला प्रशासन से शिकायत की, इसको लेकर कमेटी गठित भी की गई। लेकिन सभी जांचे ठंडे बस्ते में चली गई। राजनीति एप्रोच के कारण आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब भास्कर टीम ने पट्टे की गहराई से पड़ताल की। तो पट्टे में साफ दिख रहा है कि वैद्य परमेश्वर लाल के नाम पर पहले से खातेदारी भूमि थी, फिर भी उन्हें। ‘भूमिहीना’ की श्रेणी में डालकर ।’पट्टा नियम 157/2/’ थमा दिया गया। यहाँ साफ़ है कि सरपंच ने प्रशासन की आँखों पर भ्रष्टाचार की पट्टी बांध यह खेल खेला गया।
अभी तक नगर पालिका के नाम म्यूटेशन नहीं हुआ हैं, पूर्व में हुए अतिक्रमण पर म्यूटेशन के के बाद बाद ही कार्रवाई की जा सकती है। -सुरेश जीनगर, ईओ, नगर पालिका अतिक्रमण से संबंधित जितने भी परिवाद आए थे, सब बीडीओ को भेजे हैं। बैठकों में भी बोला था लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। -केशव कुमार मीना, उपखंड अधिकारी, गुड़ामालानी।
यह जांच रिपोर्ट अभी तक जांच अधिकारी के पास है, मुझे मिली नहीं हैं। पता करवाता हूं। -नवलाराम चौधरी, बीडीओ, गुड़ामालानी।
इस संबंध में सरपंच अनुराधा शर्मा व उनके ससुर सरपंच प्रतिनिधि दिनेश शर्मा से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने


