कमलेश प्रजापत एनकाउंटर की दोबारा जांच करने बाड़मेर पहुंची CBI:कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज की थी; पूर्व मंत्री, 2 IPS की भूमिका की भी जांच होगी
बाड़मेर जेठू जोशी
बाड़मेर जिले में 22 अप्रैल 2021 की रात को हुए कमलेश एनकाउंटर मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद सीबीआई दोबारा बाड़मेर पहुंची है।
सीबीआई यहां कोर्ट में उठे सवालों के जवाब ढूंढेगी। वहीं कोर्ट ने तत्कालीन राजस्व मंत्री और वर्तमान में बायतू विधायक हरीश चौधरी, उनके भाई मनीष चौधरी, तत्कालीन आईजी नवज्योति गोगाई की भूमिका की जांच का भी आदेश दिया था।
मामले में कोर्ट ने सीबीआई से 2 महीने में रिपोर्ट मांगी है। सीबीआई की टीम ने सर्किट हाउस में कैंप किया है। यही से आगे की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
तस्वीर, एनकाउंटर के बाद की है। कमलेश प्रजापत को गाड़ी में डालकर ले जाती पुलिस।
तस्वीर, एनकाउंटर के बाद की है। कमलेश प्रजापत को गाड़ी में डालकर ले जाती पुलिस।
सिलसिलेवार ढंग से समझिए पूरा मामला
सीबीआई ने दिया था ये तर्क
16 अप्रैल 2025 को एसीजेएम (सीबीआई) कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को नकारते हुए 2 आईपीएस समेत 24 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मर्डर का केस दर्ज करने का आदेश दिया था।
सीबीआई ने तर्क दिया था कि जांच में मिले साक्ष्य से यह साबित करना मुश्किल है कि कमलेश प्रजापति फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। इस क्लोजर रिपोर्ट को कमलेश प्रजापति की पत्नी जशोदा ने कोर्ट में चैलेंज किया था।
जशोदा के वकील अर्जुनसिंह राठौड़ के पेश तथ्यों में एनकाउंटर को फर्जी बताया गया। जिस केस में पुलिस उसे पकड़ने गई, उसमें भी कमलेश का नाम फर्जी तरीके से शामिल करने का आरोप लगाया। वहीं, पूर्व मंत्री हरीश चौधरी पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया गया था।
तस्वीर कमलेश की है। उसके पास से पुलिस को 11 लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई थी।
तस्वीर कमलेश की है। उसके पास से पुलिस को 11 लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई थी।
जवाबी कार्रवाई में एनकाउंटर की बात कही थी
बाड़मेर एससी-एसटी सेल के तत्कालीन डीएसपी पुष्पेंद्र आढ़ा ने 23 अप्रैल 2021 को सदर थाने में रिपोर्ट दी थी। जिसमें तस्कर कमलेश प्रजापति द्वारा जानलेवा हमला करने के जवाब में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके एनकाउंटर की बात कही थी।
पुष्पेंद्र आढ़ा ने 23 अप्रैल 2021 ने रिपोर्ट में बताया था कि 22 अप्रैल 2021 को सदर थाना क्षेत्र के सेंट पॉल स्कूल के पीछे एक मकान में पुलिस कमलेश प्रजापति को पकड़ने गई थी। तब कमलेश एसयूवी गाड़ी से गेट तोड़ कर भागा तो पुलिस कमांडों ने गोली मार कर एनकाउंटर कर दिया था। इसके सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए थे।
कमलेश के एनकाउंटर के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया था। कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सर्च ऑपरेशन में 59 लाख 69 हजार 50 रुपए नकदी, लग्जरी वाहनों सहित 11 अलग-अलग कंपनी की गाड़ियां, 5 अवैध पिस्टल, 9 मैगजीन, 121 कारतूस, 2 किलो 360 ग्राम अफीम का दूध, 1 किलो 715 ग्राम डोडा-पोस्त, 13 मोबाइल फोन, 4 डोंगल और एक एटीएम पुलिस ने जब्त किए थे।
जांच के दौरान सीबीआई ने फायरिंग का सीन रिक्रिएट किया।
जांच के दौरान सीबीआई ने फायरिंग का सीन रिक्रिएट किया।
तत्कालीन सरकार ने सीबीआई को सौंपी थी जांच
कमलेश प्रजापति के एनकाउंटर को लेकर तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया था। इस पर तत्कालीन सरकार ने 31 मई 2021 को जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई के तत्कालीन एसपी एमएस खान ने 5 जुलाई 2021 को बाड़मेर के सदर थाने में FIR दर्ज करवाई थी।
सीबीआई ने लंबी जांच के बाद कोर्ट में नेगेटिव क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया था कि जांच के दौरान मिले सबूतों से यह साबित करना मुश्किल है कि कमलेश प्रजापति फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। सीबीआई ने रिपोर्ट में परिजनों के फर्जी मुठभेड़ के दावे को खारिज कर दिया था।
क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ पत्नी ने लगाई थी याचिका
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ मृतक कमलेश की पत्नी जसोदा ने 28 मार्च 2023 को याचिका लगाई थी। इस पर सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारी पुष्पेंद्र आढ़ा ने कोर्ट के सामने कोई पक्ष नहीं रखा था। जसोदा ने कोर्ट में कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गई। उन्होंने तर्क दिया कि तत्कालीन राजस्व मंत्री हरीश चौधरी से कोई पूछताछ नहीं की गई। मृतक के घर पर लगे सीसीटीवी की डीवीआर के फुटेज भी डिलीट किए गए।
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राजस्थान के बाड़मेर जिले में 22 अप्रैल 2021 की रात को हुए कमलेश एनकाउंटर मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। दो आईपीएस सहित 24 पुलिस कर्मियों पर मुकदमे के आदेश दिए हैं।


